हिन्दी में कहानियां
यह घटना किसी सामान्य इंसान के साथ नहीं घटी, बल्कि एक दारोगा जी के साथ घटी थी। थाने में पहुंचे तो हाथ की ओर देखा तो पाया कि घड़ी तो घर पर ही छूट गई है। दरोगा जी रिपोर्ट दर्ज करते करते अपने कॉन्स्टेबल से कहते हैं कि घड़ी आज मै घड़ी मेज पर ही छोड़ कर चला आया हूं। थाने में एक चोर भी था। उसमें दारोगा जी की सारी बात सुन ली थी।
कुछ ही समय बाद एक आदमी दो मुर्गिया लिए दारोगा जी के घर पहुंचा और उसने दरोगा जी की पत्नी के पास जाकर दोनों मुर्गे देते हुए कहा की साहब ने भेजा है कामा शायद कोई रात को खाने पर आने वाला है और मेज पर उनकी घड़ी छूट गई है, उसे मंगाया है। दरोगा जी की पत्नी ने तुरंत घड़ी लाकर उस व्यक्ति को दे दी और उससे मुर्गियां ले ली।
शाम को दरोगा जी जब घर आए तो उनकी पत्नी ने पूछा , कौन आने वाला है? दरोगा जी ने कहा, कोई भी नहीं। तब उनकी पत्नी ने कहा तो आपने यह मुर्गी या किसके लिए भिजवाई है? दरोगा जी ने जब दूसरा सवाल सुना तो वह चौक गए और पूछने लगे कैसी मुर्गी? तब उनकी पत्नी ने बताया कि आपका ही एक आदमी घर पर आया था वह दो मुर्गिया दे गया है और आपकी घड़ी ले गया ।
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दारोगा जी परेशान हो गए और कहने लगे कि ऐसा मेरे साथ कैसे हो सकता है। पत्नी को कहने लगे कि आगे से इस प्रकार किसी की बात पर विश्वास ना करना।
अगले दिन थाने पहुंचे तो बड़े गुस्से में थे। और कहने लगे चाहे जैसे भी हो उस आदमी को पकड़ना ही है हमें , जिसने मुझे धोखा दिया है। उन्होंने अपने सभी सिपाहियों को बुलाकर कहा कि उस घड़ी वह मुर्गी वाले को किसी भी प्रकार पकड़ कर उनके सामने लाएं ।
कुछ ही समय बाद फिर दूसरा आदमी दौड़ता हुआ दरोगा जी के घर पर पहुंचा और हंसता हुआ उनकी पत्नी से बोला , मेम साहब वह घड़ी चोर पकड़ा गया और साहब ने उसे थाने में बंद भी कर दिया। साहब ने मुझे भेजा है कि वह मुर्गी या लेकर आऊं। दरोगा जी की पत्नी ने खुशी-खुशी मुर्गियां लाकर दे दी और बोली, उस चोर कड़ी सजा दिलवाना ताकि आगे से ऐसी हरकत ना करें।
ठीक मेम साहब उस आदमी ने कहा और मुर्गियों को लेकर चलता बना। शाम को जब दारोगा जी घर वापस लौटे तो उनकी पत्नी ने खुशी से उनका स्वागत किया और पूछा कि उस चोर को आपने इस सजा दी या नहीं थोड़ी ना।
कौन से चोर को? दारोगा जी ने पूछा ? वही जो पकड़ा गया था आप ही ने तो आदमी से खबर भिजवाई थी और मुर्गिया मंगवाई थी उनकी पत्नी ने कहा।
इधर फिर से दारोगा जी चिंता में पड़ गए। ना घर के रहे न घाट के रास्ते भर यही सोच रहे थे कि अब घड़ी तो नहीं मिलेगी तो चलो अब मुर्गी पर हाथ फेर कर संतोष करेंगे। घर आकर यह देखा कि यहां तो करा धरा सब मिट्टी हो गया। घड़ी भी गायब और मुर्गी भी उड़ गई ।


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